जशपुर (छत्तीसगढ़)।।
जशपुर जिले के थुथियांबा गांव में यह एक ठंडी और हवादार सुबह है, 20 साल
की बसंती अपने एक साल के बेटे को सीने से लगाए बैठी है, लेकिन इस सुकून के
पल में बसंती खुद को लुटा हुआ महसूस कर रही है। बसंती के भीतर विचार चल रहा
है कि उसका बेटा बड़ा होगा लेकिन कभी अपने पिता का नाम नहीं जान सकेगा।बसंती सिर्फ 12 साल की थी जब पड़ोस के गांव की महिला उसे घरेलू काम कराने के लिए नई दिल्ली लेकर गई थी। छह साल बाद, वह पांच महीने की गर्भावस्था में घर लौटी। बसंती का लगातार बलात्कार हुआ, ऐसा उस घर में हुआ जहां वह काम करती थी।
जशपुर में बसंती की तरह हजारों लड़कियां हैं, यह इलाका देशभर में घरेलू नौकरानी के रूप में नाबालिग लड़कियों और महिलाओं की खरीद फरोख्त का बड़ा बाजार बन गया है, खासतौर से दिल्ली और मुंबई। अधिकतर लड़कियों का जीवन शारीरिक रूप से दुर्व्यवहार और यौन शोषण का शिकार होकर खत्म होता है, कुछ एड्स के साथ लड़ते हुए अंत की तरफ बढ़ती हैं। हाल ही में खत्म हुए विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राज्य गृह मंत्री नानकी राम कंवर ने बताया कि बीते एक साल में जशपुर और पड़ोसी जिलों से ही 6000 से ज्यादा युवा लड़कियां गायब हुई हैं। दूसरी तरफ, राज्य के महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी इसे दोगुने से भी ज्यादा बताते हैं जो कि 13000 लड़कियां हैं। स्टेट रिसोर्स सेंटर ने एडल्ट एंड कंटिन्यूइंग एजुकेशन 2009 के सर्वे में कहा कि बीते 7-8 साल में यहां से लगभग 20,000 लड़कियों की देश के बाकी हिस्सों में खरीद फरोख्त हुई।
यह आंकड़े हैरान कर देने वाले हैं; इन लड़कियों की कई कहानियां हैं। बसंती तो सिर्फ एक उदाहरण है, उसके साथ तीन बार जबरन सेक्स किया गया वह भी वहां जिस घर में वह काम करती थी। बसंती ने कहा, मैंने कई बार विरोध किया और मालिक से शिकायत करने की कोशिश भी की लेकिन किसी ने उसकी नहीं सुनी। इस तरह से शिकार बनीं कई लड़कियां मानसिक संतुलन तक खो बैठी हैं।

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