नई दिल्ली। भारत में महिलाएं या तो मोटापे का शिकार होती जा रही हैं या फिर कुपोषण का। हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण के नतीजों ने सरकार के समक्ष नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिनसे निपटने के लिए नई नीतियां बनानी होंगी। सर्वेक्षण के तहत भारत में जनसांख्यिकी व स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।
औसत या औसत से कम आमदनी वाले 37 देशों में कराए गए 'चेंज इन बॉडी मास
इंडेक्स डिस्ट्रीब्यूशन फॉर विमन' नाम के सर्वेक्षण के अध्ययन के बाद पता
चला है कि भारत में औसत वजन वाली महिलाएं बहुत ही कम रह गई हैं। बॉडी मास
इंडेक्स के तहत किसी व्यक्ति की औसत लंबाई के आधार पर उसका वजन निर्धारित
किया जाता है। यहां अत्याधिक वजन वाली महिलाओं से ज्यादा आबादी ऐसी महिलाओं
की है, जो कुपोषण की शिकार है और जिनका वजन औसत से बहुत कम है। यह
सर्वेक्षण यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो और हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ द्वारा
कराया गया है। हावर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के जनसंख्या, स्वास्थ्य और भूगोल के प्रोफेसर एसवी सुब्रमण्यम के मुताबिक, शोध के नतीजे काफी चौंकाने वाले हैं। औसत आमदनी वाले देशों जैसे भारत में मोटे और औसत से ज्यादा वजन वाले लोगों का वजन लगातार बढ़ता जा रहा है। जबकि कुपोषण के शिकार और औसत से कम वजन वाले लोगों का वजन इस अनुपात में नहीं बढ़ रहा है।'
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2005 में भारत की 25 प्रतिशत आबादी कुपोषण की शिकार थी। उस समय अत्याधिक वजन वाली महिलाओं की संख्या देश में दोगुनी थी। कुपोषित महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो स्वास्थ्य समस्याओं का एक भयावह चेहरा उजागर करती हैं। टोरंटो में सेंट मिशेल हॉस्पिटल के फेलो और शोध के प्रमुख लेखक फरहाद रजाक ने बताया कि मोटे लोगों की तुलना में कम वजन वाले और कुपोषित लोगों की मौत ज्यादा होती है।

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