Wednesday, January 16, 2013

संतोष आगे बढ़ी और बदल गई परंपरा


हरिद्वार: महिलाएं अब रूढ़ीवादिता को तोड़ हर क्षेत्र में नई इबारत लिख रही हैं। इसी कड़ी में जयपुर राजस्थान की संतोष ने रूढि़यों को तोड़ते हुए लावारिसों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित की।
जयपुर राजस्थान की संतोष जायसवाल बेड़ियां अपनों के लिए नहीं, बल्कि उन अभागों के लिए तोड़ रही हैं जिन्हें मृत्यु के बाद गंगा की गोद भी नसीब नहीं होती। हरकी पैड़ी पर उन्होंने 35 ऐसे लोगों की अस्थियां विसर्जित की, जिनसे उनका कोई सरोकार नहीं रहा। ऐसे लावारिस लोगों की अस्थियां उन्होंने हरकी पैड़ी पर प्रवाहित की। जयपुर में सिलाई मशीन का व्यवसाय करने वाली संतोष जायसवाल बताती हैं कि तीन साल पहले जयपुर में उन्हें इसकी प्रेरणा मिली। इलाज के लिए पहुंचे एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, उसके परिजनों के पास अंतिम संस्कार करने तक के लिए पैंसे नहीं थे। वे परिजनों के साथ श्मशान घाट गई और अंतिम संस्कार करवाया। फिर वे इस तरह के काम निस्वार्थ तौर पर करने लगीं। फिर उन्होंने लावारिस लोगों को मोक्ष दिलाने का संकल्प लिया और हरिद्वार आकर अस्थि विसर्जन किया। पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अस्थियां प्रवाहित करने के बाद उन्होंने दिवंगतों की आत्माओं की शांति के लिए गंगा में डुबकी लगाई। संतोष जायसवाल का कहना है कि अपने लिए तो हर कोई जीता है, दूसरों के लिए कुछ कर सकें तो इससे बेहतर कुछ नहीं। तीर्थ पुरोहित गोपाल शर्मा का कहना है कि यह प्रयास सराहनीय है।

दूसरी बार आई पैड़ी
संतोष जायसवाल दूसरी बार लावारिस लोगों की अस्थि विसर्जन करने हरिद्वार आई। पिछले माह उन्होंने 38 लोगों की अस्थियों को गंगा में प्रवाहित किया था। उनका कहना है कि आगे भी वह लावारिस अस्थियों को गंगा में प्रवाहित करेंगी। दिवंगतों की आत्माओं को शांति मिले यही उनका ध्येय है।

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